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स्वाति गर्ग। (विधा : उद्धरण) (मेरा पहला प्यार | सम्मान पत्र)

वक़्त के तराज़ू में भी जो हल्की नहीं पड़ती

होती है वो पहले प्यार की कसक़ जो धुंधली नहीं पड़ती।

स्व रचित

#स्वातिगर्ग

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