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हे स्त्री!

हे स्त्री!
………….

हे स्त्री! मत सोच कि जमाना क्या कहता है?
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है..

कहते हैं जब तुझे निर्बल, तब खून मेरा उबलता है।
करा दे स्वयं की शक्ति का एहसास, जो यह सोचता है।
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है..

मेहनती और साहसी व्यक्ति, रास्ते स्वयं खोजता है।
तेरी प्रतिभा और कौशल का अवसर आज यह बोलता है।
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है..

मौन रहकर कुछ विचित्र करना तेरी क्षमता है।
उठ जा अब मत सो,तू ही कर्ता धर्ता है।
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है..

बराबरी का सम्मान न मिले, तब मुझे अखरता है।
पोंछ ले आंसू अब, जो आंखों से झरता है।
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है…

“वूमेन डे”एकदिन नहीं,रोज़ यह दिन होता है।
ठान ले अगर तू, सब तेरे लिए मुमकिन होता है।
वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है..

उर्मिला सिसोदिया

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