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Poetry

हे स्त्री!

हे स्त्री! …………. हे स्त्री! मत सोच कि जमाना क्या कहता है? वहीं कर जो तुम्हारा दिल कहता है.. कहते हैं जब तुझे निर्बल, तब

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मां की व्यथा!

मां की व्यथा ………………….. जब भी तेरा बचपन देखा बह गई अश्रु की धार। इस बार भी तू नहीं आया सूना रह गया त्योहार। अपने

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Poetry

आत्मनिर्भर भारत!

यह मेरे द्वारा लिखी गई यह कविता आज के युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा  देता है। इसमें स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने पर भी

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