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Poetry

ठहराव

ठहरे हुए पानी में जैसे थोड़ा बहाव ज़रूरी था, भागती दौड़ती इस ज़िदगी में थोड़ा ठहराव ज़रूरी था, ज़रूरी था कि हम अपने अंतर्मन को

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Poetry

प्रकृति गीत

प्रकृति-गीत वीरान जंगल, नाचते मयूर, कल कल बहते झरनें, महकते गुलाब और जूही, गाती कोयल और बटेर, क्या कहते है हमसे? क्या कोई पैगाम सुनाते

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Poetry

SUNSET

Death celebrates day, it’s a way. Soil grains love cells, the Truth of hell.

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Hindi Poetry

तुम ही थे

कहीं बैठा था मैं अपने स्वप्न-मित्रों के साथ और लगा तभी मुझे कि एक हवा के झोकें से कुछ विचलित सा हो गया हूँ मैं

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Hindi Poetry

तन्हाई की भाव-भरी बातें

कभी सुनी है तुमने तन्हाई की आवाज़बैठे थे जो साथ, हम तुम कभीहाथों में हांथ भी था, और महसूस किया थाहृदय-भावों का निर्मल चुम्बन।किंचित आँखों

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Hindi Poetry

प्रकृति

जहाँ जाने के बाद वापस आने का मन ना करे जितना भी घूम लो वहाँ पर कभी मन ना भरे हरियाली, व स्वच्छ हवा भरमार

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Poetry

Coronavirus in my Country

(Poem) Coronavirus In My Country It is sad everywhere, Nothing is on the way, Streets quite and lonely, Like at the graveyard, Is perplex, I

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धरती माँ

धरती यही तो है हम सबकी माँ ! इस जेसा कहाँ दूसरा ! इसकी पनाह मै ! दुिनया पलती है ! जो पल पल रंग

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Hindi Poetry

ख्वाहिशें

फिर इक नयी उम्मीद, फिर इक नयी चाहत फिर इक नया सवेरा आ चल कर लें ख्वाहिशें पूरी कि जब तक साथ है तेरा और

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