
ठहराव
ठहरे हुए पानी में जैसे थोड़ा बहाव ज़रूरी था, भागती दौड़ती इस ज़िदगी में थोड़ा ठहराव ज़रूरी था, ज़रूरी था कि हम अपने अंतर्मन को

ठहरे हुए पानी में जैसे थोड़ा बहाव ज़रूरी था, भागती दौड़ती इस ज़िदगी में थोड़ा ठहराव ज़रूरी था, ज़रूरी था कि हम अपने अंतर्मन को

प्रकृति-गीत वीरान जंगल, नाचते मयूर, कल कल बहते झरनें, महकते गुलाब और जूही, गाती कोयल और बटेर, क्या कहते है हमसे? क्या कोई पैगाम सुनाते

कहीं बैठा था मैं अपने स्वप्न-मित्रों के साथ और लगा तभी मुझे कि एक हवा के झोकें से कुछ विचलित सा हो गया हूँ मैं

कभी सुनी है तुमने तन्हाई की आवाज़बैठे थे जो साथ, हम तुम कभीहाथों में हांथ भी था, और महसूस किया थाहृदय-भावों का निर्मल चुम्बन।किंचित आँखों

जहाँ जाने के बाद वापस आने का मन ना करे जितना भी घूम लो वहाँ पर कभी मन ना भरे हरियाली, व स्वच्छ हवा भरमार

(Poem) Literature is a mirror The world is empty without history, Reflection is binary, Literature relaxes all, It educate the world, It is colorful like

(Poem) Coronavirus In My Country It is sad everywhere, Nothing is on the way, Streets quite and lonely, Like at the graveyard, Is perplex, I
धरती यही तो है हम सबकी माँ ! इस जेसा कहाँ दूसरा ! इसकी पनाह मै ! दुिनया पलती है ! जो पल पल रंग

फिर इक नयी उम्मीद, फिर इक नयी चाहत फिर इक नया सवेरा आ चल कर लें ख्वाहिशें पूरी कि जब तक साथ है तेरा और
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