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Hindi Poetry

“चुप” रहने की आसानी पर

आसान है चुप रहना बहुत आसान है बकबादियों के विवर में चुप रहकर बचे रहना कालों की दुनिया में सफेदपोश हो किसी भी अंदर के

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एक हद होती है

एक हद होती है, किसी इल्तिज़ा की, हर बार, गिड़गिड़ाया भी, नही जाता। बुत सा चुप रहना, कैसी है सियासत, मन्नत बेअसर, अब कोई नही

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यार नहीं होते तो

नैया है सबकी, सब हैं खिवैया ज़िम्मेदारी सबकी, सब हैं मुखिया यार नहीं होते तो पतवार नहीं होती पतवार नहीं होती तो मँझधार ले डूबोते

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ग़ज़ल

ग़ज़ल ( आदत न रखे ) जवानी से उलझने की, नीयत न रखे। दख़लंदाज़ी करने की, जुअरत न रखे ।। ऐसे दौर से गुज़रना अनहोनी

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ईद

हमने हवाओं का रुख बदल दिया है, शुष्क हवाओं में नमी को भर दिया है, रमजान की अदानों के जरिए, रुहानी महक को भर दिया

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