वर्षों से बहुत कुछ दबा छुपा इस मन में
आने को आतुर बाहर इस जीवन में
उसको चुपचाप यूँ ही सुप्त पड़ा रहने दो
मन का आवेग बाँध थोड़ा तुम
स्नेह-धारा अविरल बहने दो
खरे सोने सा तपा मेरा मन
आकुल है प्रतिपल कुछ-२ कहने को
नि:श्शाँत पड़ा रहने दो उसको
जीवन-धारा निर्झर निर्भय बहने दो
पूरी शक्ति पूरी ताक़त से तुम चलते ही रहना
जीवन में हरदम आगे ही आगे बढ़ते रहना
यही मूल मंत्र है जीवन का
नहीं अर्थ है कुछ भी खोने या पाने का
@reetatandonbadhwar
12 Comments on “मन की आवाज़”
very nice
Beautiful lines
Beautiful emotions , keep writing ✍️ Ma’am
Beautiful lines
So Beautiful lines and expression 👌👌👍👍👍
Atti sunder abhiwaqti 👏👏👏
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
वाह!!वाह!!वाह!!
Bahut khoob di
बहुत सुन्दर
Awesome lines
So effortlessly magical… amazing creativity.