
रीता बधवार। (विधा : उद्धरण) (दादी नानी की कहानियाँ | प्रशंसा पत्र)
दादी के क़िस्से,नानी की कहानियाँ उनके साथ उनकी ज़ुबानियाँ बातें ,नसीहतें सवा लाख टके की याद दिला जातीं शरारती बचपन की @ रीता बधवार

दादी के क़िस्से,नानी की कहानियाँ उनके साथ उनकी ज़ुबानियाँ बातें ,नसीहतें सवा लाख टके की याद दिला जातीं शरारती बचपन की @ रीता बधवार

मैंने नहीं सुनी दादी-नानी की रोचक कहानियाँ, जो कुछ भी सुना वो अपनी माँ की ज़ुबानियाँ, मैंने कभी उन्हें देखा नहीं,जाना नहीं,सुना नहीं, हसरत ही

वो पल भी कितने प्यारे थे, हाय, यादें वो कितनी मस्तानी थी, बचपन की हर एक याद कितनी सुहानी थी, ना कोई चिंता मन में,

अरे!! अपने हल्कू को देखा है, इतनी बड़ी उम्र में इतनी कम उम्र की ब्याहता लेकर आया है ।गांव में कानाफूसी हो रही थी ।सारी

बड़ी अम्मा❤️ नेहरू सभागार, नई दिल्ली “तो इस साल का यंग एचीवर अवार्ड जाता है मध्यप्रदेश के छोटे से क़स्बे छतरपुर की हर्षिता शर्मा को

बचपन में दादी नानी की कहानियाँ हम बच्चों को अत्यंत ही लुभाती थी। वे केवल मनोरंजक ही नहीं शिक्षाप्रद भी होती थीं। दादी को तो

(पुराने दरवाजे की कुण्डी) हां यही पुराना वाला आंगन था, जिसके पिछले दरवाजे से लटकती थी हमारे बचपन की सबसे ऊंची और कठिन कुंडी। जिसके

“दादी नानी की कहानियाँ सुनकर जो होते हैं बड़े जीवन के महान संग्राम वो ही जमकर होते हैं खड़े मुसीबतों का अंबार हो या विघ्न

दादी नानी की कहानियाँ , कुछ लम्बी-कुछ छोटी , कुछ मज़ेदार -कुछ डरावनी और उनकी ही ज़ुबानी; मन के एक कोने में सजी संवरी बैठी

संस्कारों की घुट्टी किताबों में क्यों ढूंढ़ते हो उसके लिए तो दादी के किस्से ही काफ़ी है। © श्वेता प्रकाश कुकरेजा
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