
भार्गवी रविन्द्र। (विधा : उद्धरण) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)
माँ ममता की मूरततो पिता एक मंदिर ये मूरत रखी जाती है जिसके अंदर पिता का प्यार जैसा गहरा सागर निःस्वार्थ, निश्चल ,निर्मल जैसे अंबर।

माँ ममता की मूरततो पिता एक मंदिर ये मूरत रखी जाती है जिसके अंदर पिता का प्यार जैसा गहरा सागर निःस्वार्थ, निश्चल ,निर्मल जैसे अंबर।

बाबू तुम कितने शांत कितने अच्छे, तुम्हें प्यार करते हम बच्चे, एक बार बस एक बार आ जाओ, मेरे सर पर अपना स्नेहिल हाथ फिरा

वाह पापा वाह रिचा सुंदर सुशील उपाध्याय जी की इकलौती पुत्री इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा

क्या ?? ….जीनत का पता चल गया??….. क्या हुआ ?किस का फोन है?…….. जीनत की माँ अपने पति से पूछ रही थी। पिता निढाल होकर

प्रिय पापा मुझे अकेला अनाथ छोड़कर जाने कहाँ आप खो गये ? देश की सरहद को दुशमनों से बचाया और खुद चिरनिद्रा में सो गये

अनकही बातें,भावनाएँ जो भीतर ही रह गईं शब्द बन कर जो जीव्हा पर ना आईं।। मन ही मन घूमती रही भीतर मैं इतराती रही,थी जिन

हर एक पिता में, समझो तो, थोड़ी सी माँ भी होती है वो पालन पोषण करता है , माँ जिस फ़सल को बोती है शिशु

An old matriarch is always the inspiration where we are nourished with wisdom, wit, educational endeavor, family qoutes and stories with moral values. Predominantly strict

Those Bygone Summer Holidays….☀️🌝🌞☀️ It was a ritual to spend the summers at my “Naani’s” (maternal grandmother) village. As soon as the school closed for
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