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भार्गवी रविन्द्र। (विधा : उद्धरण) (एक पैगाम पिता के नाम | सम्मान पत्र)

माँ ममता की मूरततो पिता एक मंदिर
ये मूरत रखी जाती है जिसके अंदर
पिता का प्यार जैसा गहरा सागर
निःस्वार्थ, निश्चल ,निर्मल जैसे अंबर।

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