हर भारत की बेटी चाहे निर्भया हो या अफसाना
मांगती न्याय बरबस आंखों से केवल एक चाह
की होगा क्या अब अंध मूक सत्ता से क्या न्याय सक्षम होगा।
इस काल ग्रास से क्या अब घाव नासूर होगा ?
मां की कोख जहां महफूज नहीं ,
अब वहां क्या अब विराम होगा।
हे देवी ! बता क्या अब न्याय होगा ?
कब तक फैसला होगा मेरा या फिर से ,
कोई तेजाब जला चेहरा होगा,
थक गई मांग कर न्याय बताओ ना
कब तक और अन्याय होगा ?
हे न्याय की देवी सुन मेरी व्यथा
थक गई मेरी आंखें इस इंतजार में
कभी तो तेरी दृष्टि होगी
हर नारी तभी सशक्त होगी।
(स्वरचित सीमा वालिया )