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डॉ सोनिया गुप्ता। (विधा : गीत) (हीरा है सदा के लिए | सम्मान पत्र)

जियो जीवन को कुछ ऐसे, सदा हीरे सा तुम चमको,
चलो नेकी के पथ पर ही, कभी ना मार्ग से भटको !

मिला मानुष जन्म तुमको, बड़ा दुर्लभ ये पाना है,
ये तन तो एक माटी है, इसे मिट्टी में मिलना है,
करो उजला सा मन अपना, इसे हीरे सा तुम रक्खो !
जियो जीवन……….

छवि ऐसी बनाओ तुम, सदा रोशन रहो जग में,
भुलाकर गम सभी अपने, भरोसा इक रहे रब में,
चले जाओ जो इस जग से, रहो तुम याद तब सबको !
जियो जीवन……….

बहुत अनमोल हीरा है, सदा चमचम ये करता है,
भले कुछ हो कभी भी रंग फीका सा न पड़ता है,
इसी हीरे के जैसे तुम नहीं खुद को कभी बदलो!
जियो जीवन……….

अगर हीरे सा मन होता, नहीं उसकी चमक जाती,
कोई बाहर की शक्ति भी, उसे फीका न कर पाती,
उजाला सा रहे मन में, न तुम दूषित इसे कर दो !
जियो जीवन……….

बनो हीरे के जैसा तुम, चमकते ही सदा रहना,
भले जीवन में पल कैसा, कभी सतकर्म ना तजना,
सदा रोशन ये हीरा है, इसे मन में तुम ही धर लो !
जियो जीवन……….
****
डॉ सोनिया

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