इंद्रधनुष सतरंगी,रंगो के संग
धरती को छू कर,गगन में झूमता मगन
वर्षा की बूँदे रुकी,चमका सूरज
सतरंगी इंद्रधनुष का हुआ संगम।
नभ में लाया उजाला
कितना कुछ सिखा डाला
होगा इन्द्रधनुषी सवेरा
एक नहीं,साथ रंगो का बसेरा।
प्रकृति ने दिया ज्ञान
सतरंगी सपनों का संसार पूर्ण हों अरमान।
रंगो का है दर्पण
बिछड़ें रास्तों का संगम ख्वाहिशें हों रंगीन
हर लम्हा होगा बेहतरीन।
मन की सुंदरता हो ऐसे
बूँद रुकते रुकते कैसे
इंद्रधनुष दिखता जैसे
रंग मिलाओ तो वैसे।
धर सब्र,संग आस
उजला जीवन
इंद्रधनुष साथ
स्व-लिखित✍🏻
“सपना अरोरा”
2 Comments on “सपना अरोरा। (विधा : कविता) (इंद्रधनुष | सहभागिता पत्र )”
Thanks a lot UBI team and Sapna ji🙏🏻 Regards/Sapna Arora.
Thank you so much UBI team and Sapna ji 🙏🏻
Regards / Sapna Arora.