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शहला जावेद। (विधा : उद्धरण) (बर्फीली शामें | सम्मान पत्र )

सर्द – मेहरी उन नज़रों की क्या कहिए
हो गयी मेरी सब शामें बर्फीली क्या कहिए

One Comment on “शहला जावेद। (विधा : उद्धरण) (बर्फीली शामें | सम्मान पत्र )

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