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रेखा अग्रवाल । (विधा : उद्धरण) (संदीप्ति | विशेष पुरस्कार)

माँ के प्यार की, संदीप्ति में
हर चमक, फीकी लगे
स्नेह, भरा मन में
फिर हर दौलत, झूठी लगे
स्वरचित रचना🖋
रेखा अग्रवाल

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