Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Post Type Selectors

मैं और मेरी तन्हाई

मैं और मेरी तन्हाई

आज के इस दौर में

मैं और मेरी तन्हाई कहीं खो से गए हैं

हम ना एक दूसरे के साथ हैं

ना एक दूसरे के साथ हैं

ना एक दूसरे से कुछ बातें करते हैं आजकल ।

हर तरफ़ शोरगुल है, आवा-जाही हैं

हर तरफ चेहरे हैं, आवाज़ें हैं ,

उन सब चेहरों और आवाज़ों में

मेरी तन्हाई की आवाज़,

कहीं खो सी गई है ।

आज मेरा मैं कहीं अपने आप को

पाना चाहता है, फिर से जानना चाहता है

आज मेरा मैं अपने आप से और,

अपनी तन्हाई से , फिर से

बातें करना चाहता है ।

—आराधना

One Comment on “मैं और मेरी तन्हाई

Leave a Comment