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प्यार ही तो है…

आज बस यूंही समुन्द्र के किनारे जब तन्हा खडी रही, 
हर घड़ी मन मे बस एक ही खयाल आया,
क्या कोई है ऐसी जगह जहां प्यार की भक्ति नहीं?

तब ही एक चिड़िया चहचहाकर बोली, 
प्यार तो वो एहसास है, जो हर किसी के मन मे है बसा, 

माँ का अपनापन, पिता का समर्पण, 
भाई बहन की शरारतें, छोटे से बच्चे की मुस्कुराहटें, 
प्यार ही तो है.. 

फूलोँ का खिलना, बारिशों का गिरना, 
चांद की चांदनी, सूरज की रोशनी, 
दीपक की ज्योति, सीप का मोती, 
प्यार ही तो है.. 

अरे, प्यार तो वो गुण है, 
जो ना कोई तोल पाया, ना कोई नाप पाया, 
ना कोई शायर बयान कर पाया, 
ना कोई ज्ञानी समझ पाया, 

ये तो ईश्वर का वो वरदान है, 
जो हर कण कण मे है समाया..

— जीयाना जयसिंघानी

 

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