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कवि एक योद्धा – शालीन सिंह

कवि

एक योद्धा है

जो नही लड़ने को उत्सुक है

हाथ पैरों की लड़ाई

पर रोक नही सकता मन

को प्रतिकार करने से

वो शब्दों के जरिये

आपके दिमाग़ में घुसने वाला

बंदगोभी का कृमि है जो सुन्न कर देगा

आपकी थोथी यथार्तपरकता को

धीरे धीरे पर निरंतर

कवि

निमंत्रण है

आत्मा की देह को छूने का

भोग लेने का

तृप्त हो लेने का

कवि

शाबर मंत्र साधक है

जिसकी वैयक्तिकता

सार्वजनिक हो

शापित हो गयी है…..

कवि

विचारों की शून्यता

के आगे अंक लगाकर

संख्या बनाने वाला

जोड़, घटाने, गुणा भाग

में फंसा, धंसा सृजक है

जीवन का भावगीत

गाता परिव्राजक है

शालीन…..

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