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Hindi Poetry

“अवाम का आत्मकथ्य”

हम चाहने वाले पशु हैं हम जो होता है उसे ही चाहते है बाद में उसके होने का शोक मनाते हैं बाद में जो नहीं

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Hindi Poetry

“लोग”

बड़े अजीब है लोग सांप से लहराते हुए चलने वाले बात बात पर बात बदल बदल के बोलने वाले लोगों के लिए आप महज़ पीकदान

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Hindi Poetry

“पिता”

आज भी देखा है मैंने पिता को शाम को कंडिया लेकर शनिवार के रोज़ कट्टे के थैले में हमारे लिए खिलौने लाते हुए पहले छुपाते

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Hindi Poetry

“चुप” रहने की आसानी पर

आसान है चुप रहना बहुत आसान है बकबादियों के विवर में चुप रहकर बचे रहना कालों की दुनिया में सफेदपोश हो किसी भी अंदर के

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