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अनामिका जोशी “आस्था” (विधा : लघु कथा) (न्याय | सम्मान पत्र)

रोहित!! रोहित!!!

“क्या हुआ?? इतनी घबराई हुई क्यों हो ?”

रोहित, देखो!! क्या हो गया !! 

अरे ? इतनी भद्दी तस्वीरों में तुम !!! 

नहीं!! रोहित! यह मैं नहीं हूँ ।

हाँ, लेकिन चेहरा तो तुम्हारा ही है । 

बेशक ,चेहरा मेरा है, लेकिन यह मैं नहीं हूं ।

सुधा अपने होशो हवास खो बैठी थी और बदहवास हो रोए जा रही थी।

शांत हो जाओ सुधा!! मैं जानता हूँ, यह तुम हो ही नहीं सकती।

अच्छा ,यह बताओ क्या तुम्हें किसी ने परेशान किया है या कहीं से कभी कोई धमकी मिली है ?

हाँ एक दिन किसी अनजान नंबर से फोन आया था, पर मैंने बात नहीं की।

कौन हो सकता है ?? मैं नहीं जानती रोहित ।

ठीक है शांत हो जाओ। अपने आपको थोड़ा शांत करो।

चलो ,हम पुलिस को खबर करते हैं ।

नहीं रोहित ! इस तरह से तो बदनामी हो जाएगी ।

अरे! जब तुम गलत नहीं हो तो बदनामी से डर कैसा?

मानती हूँ ,मैं गलत नहीं हूं लेकिन फिर भी,,,,,,,

लेकिन वेकिन कुछ नहीं। हम आज ही शिकायत करेंगे ।

इस तरह डरोगी तो लोग और डराएंगे ।

अपने आप को संभालो और हिम्मत से काम लो।

ठीक है चलिए मैं भी देखती हूँ किसकी इतनी हिम्मत हुई है?

एक बात और ध्यान रखो,तुम्हारे जैसी कमजोर दिल वाले स्त्रियां ही इस तरह के साजिशों का शिकार होती है।

अपने आपको थोड़ा मजबूत बनाओ। तुम सही कह रहे हो रोहित। उसके बाद पूछताछ शुरू हुई ।

कुछ ही दिनों के बाद वह नंबर पहचाना गया और उन्हें बताया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों का गिरोह इस तरह की घिनौनी हरकत करता है और इससे पहले भी कई लड़कियों और औरतों के साथ इस तरह की हरकत कर चुका है ।

सोशल मीडिया पर तरह-तरह के ऐप आ जाने से इस तरह के फोटो एडिट कर दिये जाते हैं और फिर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है । जो घबरा जाते हैं वे इसके शिकार हो जाते हैं और आप जैसे जागरुक नागरिक इन असामाजिक तत्वों को पुलिस की गिरफ्त तक पहुंचाने में हमारी मदद करते हैं ।

अब तो खुश हो? आज तो तुम्हें न्याय मिल गया?

नहीं रोहित , न्याय तो मुझे आज नहीं, न्याय तो मुझे उसी दिन मिल गया था जिस दिन तुमने मुझ पर यह भरोसा किया था कि वह तस्वीर मेरी नहीं है ।

सुधा की आंखों में खुशी के आंसू थे ।

(स्वरचित) अनामिका जोशी “आस्था”

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