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सीमा वालिया । (विधा : कविता) (ग्रहण | सम्मान पत्र)

तुम्हारे और मेरे बीच की चुप्पी
भी तो ग्रहण ही है ना ……….??
सुनो ………क्या यही सच है ????
देखो ….ना …क्या यह भी ग्रहण की
तरह छठ जाएगी हम तुम फिर एक होंगे ना
सुनो ………ऐसा होगा ना……….!!!!

गुरूर करते थे हम तुम खुद पर
बेवक्त यह ग्रहण का ठहराव क्यों ??
सुनो …………क्या यही सच है ????
देखो ……ना… क्या यह भी ग्रहण की तरह
बादलों से लिपटा है शायद रोशन फिर से होगा
संसार हमारा सुनो …..ऐसा होगा ना…..!!!!

ना तुम मुझसे कुछ कह गए ना
मैं तुमसे कुछ कह पायी शायद??
सुनो ……..क्या यही सच है ????
देखो …….ना… क्या यह भी ग्रहण का असर है
आधे चांद का वरण भी हमारा और पूरे सूरज की
रोशनी भी हमारी सुनो ……ऐसा होगा ना……!!!!
(स्वरचित सीमा वालिया

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