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शशि कांत श्रीवास्तव (विधा : कविता) (न्याय | सम्मान पत्र)

नमन देश के न्याय प्रणाली को 

नमन देश के कठोर कानून को 

नमन कानून की  देवी को –जो 

लिये रहती है हमेशा तराजू न्याय का 

और बांधे रहती काली पट्टी आँख पर 

जो न्याय के लिए लेती है समय ज्यादा 

पर ,न्याय देती है सदा सत्य के पक्ष में 

वहीं …..,

मिला न्याय आज देश की एक बेटी  को 

जिसके साथ हुआ था-अत्याचार व दरिंदगी 

मिला   न्याय आज    उस माँ को 

जिसकी  बेटी हुई  थी शिकार दरिंदगी  का 

समय लिया सात साल चौंतीस दिन का 

पर दिया न्याय देश की बेटी के पक्ष में 

देश के न्याय के मंदिर ने 

मिला न्याय आज देश की 

एक    बेटी को  ….. ||

 

शशि कांत श्रीवास्तव 

    डेराबस्सी मोहाली ,पंजाब 

    ©स्वरचित मौलिक रचना

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