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वैशाली तांबे। (विधा : उद्धरण) (बर्फीली शामें | सम्मान पत्र )

तन-मन सिहर जाता है याद जब आता है वो मंज़र। वो बर्फीली शामे गुज़रती थी खाकर
मायूसियों का खंजर।
वैशाली तांबे

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