आकाश पर उभरा इंद्र का धनुष,
मन को धड़काता इंद्रधनुष,
सात रंगों की सतरंगी बहार,
मन को लुभाये इसका संसार,
वर्षा के बाद का मनभावन दृश्य,
आकाश में रिमझिम तरंगों का इंद्रधनुष,
कितना अच्छा लगता है मन को,
झंक़त कर जात अंतस् के तारों को
बारिश के बूँदों की मोती सी लड़ी,
सूरज की किरणों की स्वर्णिम छड़ी
सिक्ता कणों की अनमोल कड़ी,
कुल मिलाकर बनाती इंद्रधनुष घड़ी,
छत पर खड़ी मैं सपनों में खो जाती
कुछ देर,दु:ख-दर्द सब भूल जाती,
लाल नारंगी पीला हरा नील बैंजनी चूड़ियों सी झंकार वाला इंद्रधनुष
मन में नव स्पंदन जगाता,
आस के नव पुष्प खिलाता,
आने वाले नये मौसम की झलक दिखाता,
धरती को नव जीवन दे जाता,
सबके मनाकाश का अपना एक
इंद्रधनुष होता है,
जिसके साये में वह सतरंगी सपने
बुनता है,
दोस्तों !! सपने देखना कभी मत छोड़ना ,
पर सपने पूरा करने को कमर ज़रूर
कस लेना ,
3 Comments on “रीता बधवार (UBI इंद्रधनुष प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र )”
Once again it is beautifully expressed
Wonderful composition.
Very beautiful, congratulation