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रीता बधवार। (विधा : कविता) (काला धब्बा | प्रशंसा पत्र)

नज़र-नज़र की बात है,
दुखते दिलों का सवाल है,
काला धब्बा ख़ूबसूरती का प्रतीक है,
या दु:खी दिलों का मलाल है,

शिशु के भाल पर चमकता काला टीका,
नजरबट्टू या ‘डिठौना’ कहलाता है,
माँ के जिगर के टुकड़े को जो..
नज़रे-बद‌ से बचाता है,

यही “काला धब्बा” कभी किसी बेबस के,
कोरे आँचल का मैला दाग़ बन जाता है,
सारी उम्र उस मज़लूम को …
ख़ून के आँसू रुलाता है,

वैज्ञानिक के नज़रिए से ये काले धब्बे,
चाँद की सतह के गहरे काले गड्ढे हैं,
किसी कवि की सुनहरी कल्पना में,
ये प्रेयसी के कपोल का काला तिल हैं,

काला धब्बा सुंदरता का सकारात्मक प्रतीक बने,
यही हमारी इल्तिजा है….
यह हमारी सुसंस्कृत सभ्यता पर गंदा दाग़ बने,
इस पर हमें सख़्त एतराज़ है,

@रीता बधवार

 

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