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रजिन्दर कोर(विधा : मुक्तक) (फूल खिले हैं गुलशन गुलशन | प्रशंसा पत्र)

गुलाब की तरह महका करो ,
सब के दिलों में चेहका करो ,
जीवन में अगर आए मुसीबत ,
तुम न यूँ कभी बेहका करो ।

रजिन्दर कोर (रेशू)
अमृतसर

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