Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Post Type Selectors
Time

मुक्ता टण्डन(2) ( समय प्रतियोगिता | युगान्तकारी रचना हेतू प्रशंसा पत्र )

समय मेहरबान तो जहां निगेहबान
समय की महिमा अपरंपार, इससे कोई भी पार नहीं पा सकता।इसकी शक्ति,इसकी महिमा को कोई नकार भी नहीं सकता। अनंत काल से क्या राजा क्या रंक कोई भी इसके पाश से बच नहीं पाया। कहते हैं समय खराब चल रहा है,उसका शनि ,उसका मंगल ,ये सब वक्त के ही रूप हैं।अविरल है इसकी गति,इसे रोकना असंभव।कब आता है ,किसरूप में आता है? ये पहेली आज तक कोई भी सुलझा न पाया
वक्त जो गुज़र गया लौटकर वापस नहीं आता। बस अपना पद चिह्न छोड़ जाता है। इतिहास बन जाता है।पल पल अमूल्य है समय का
इसी लिए कहते हैं वक्त की कदर करो ,व्यर्थ में यूं ही मत गवांओ।हांथ पर हांथ धरे मत बैठो
, वरना बाद में पछताना पड़ेगा।
जिसने भी अपने गुज़रे कल से प्रेरणा लेकर आज काम किया
उसका आने वाला कल भी संवर जाएगा।
दिन कट जाएगा ,रात भी कट जाएगी,समय को पहचानने से ही ज़िंदगी संवर जाएगी।

Leave a Comment