जिस चाँद का दीदार , त्योहार बन जाता
जो सिवइयों और फैनी की मिठास है लाता
वो चांद न सिर्फ तेरा है,न सिर्फ मेरा है फिर क्यों दिलों में कड़वाहटों का बसेरा है
पूनम की रोशनी तेरे घर भी आती और मेरे भी
फिर क्यों दिल के आंगन में तम का डेरा है
वो चाँद न सिर्फ तेरा है ,ना चाँद सिर्फ मेरा है
अमावस की स्याह रात में एक दिया तू जला इबादत का
ईक दिया मैं जलाऊं मुहब्बत का।
तम मिटा दें मिल कर हम नफरतों का
हमराही बन हाथ थाम लें , क्योंकि रास्तों में बहुत अंधेरा है
वो चाँद न सिर्फ तेरा है ,न सिर्फ मेरा है
स्नेह से दीपमाला हम बनाएं
सर्वहित संकल्पों का चलो थाल सजाएं
“मै”से चलों फिर “हम ” बन जाएं
क्योंकि हिन्द तो वो मेरा भी , और तेरा भी
क्योंकि हिन्द तो वो मेरा भी , और तेरा भी
नई सोच नई कल्पना के दीप जलाएं
आओ मिल कर इस हिन्द को रोशनायें
अमावस की रात को ,पूनम की रात बनाएं
नवल ज्योति नव प्रकाश से ये दीवाली मनाएं
