जंगल की एक सुबह
शेर चुनाव हार गया था
जीत गया था बंदर
सिंहासन पेड़ पर लग गया था
बंदर ने सिंहासन पकड़ रखी थी
भेड़िए, सियार की निकल पड़ी थी
जिसको चाहे उठा लाते
मजे से दावात उड़ाते
जानवरों ने फरीयाद लगाई
दुखती काया अपनी दिखलाई
बंदर ने परिस्थिति को तौला
यह काम नीच शेर का है बोला
मैं बड़े बड़े काम करूंगा
उस नीच को नहीं छोडूंगा
यह कह नीचे उतरा बंदर
झट से चढ़ गया दूसरे पेड़ पर
पेड़ दर पेड़ कूदते बंदर को
सब सोचते करेगा कुछ खास
थक कर शान से आया बंदर
भोले जानवरों के पास
बोला आपकी सेवा के लिए
करता रहूंगा सदा ऐसे काम
बाकी सब भूल कर आप
लीजिए प्रभु का नाम