कुछ खुशियांँ ,कुछ आंँसू
कुछ मुस्कुराहट,कुछ गुस्सा
कुछ धूप ,कुछ छांँव
कुछ दमकती काया
कुछ मोह,कुछ माया
कुछ भागम भाग ज़िन्दगी की
कुछ थकन ज़िन्दगी की
कुछ पल फुर्सत के
कुछ फुर्सत को तरसते पल
कुछ संघर्ष ,कुछ समझौते
कुछ हार,कुछ जीत
कुछ दुलार,कुछ प्यार
कुछ अल्हड़ता,कुछ नादानियां
कुछ अनुभव,कुछ समझदारीयां
कुछ बेफिक्री जवानी की
कुछ झुर्रियां ढलती उम्र की
कुछ उलझनों के जाल
कुछ चांँदी के बाल
क्या कुछ नहीं रखा है
जीवन के इस गुल्लक में
इन सिक्कों से भर
गुल्लक मुस्काता है
ख़ुद को परिपूर्ण पाता है
हिना शाहिस्ता✍️
स्वरचित/अप्रकाशित
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