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शैलेंद्र कपिल (कविता) – (धन्यवाद २०१९ | सम्मान पत्र)

धन्यवाद २०१९

परिन्दों को भोजन की दरकार होती है,
दिनचर्चा, हम सभी के एक
समान होती है,
स्वर होगें,मतलबी, स्वार्थी,
लेकिन हमारे लिये आमंत्रण
के शंखनाद होते हैं….।

मतलब स्वार्थ, ही जीवन का एक पहलू,
पूर्ण होने पर,शुरु होता,दूसरा अध्याय,बन कर दूसरा पहलू,
स्वावलंबी है बनाता, स्वार्थ
सिद्धि का परिणाम,
स्वावलंबन से शुरु होता है,
परमार्थ का पाठ,बनता नया
दिनमान,

लोम विलोम,स्वार्थ, निस्वार्थ ही दिखता है,
कभी प्रतिबिम्ब होकर,
कभी परिचय देकर मिलता है,
मन परिचय से परिणाम खोजने सा लगता है,
यह कैसी विडंबना है,जो,
मतलब को,अच्छे से समझता है,

हम सभ्य होते आगे बढ रे हैं,
सूचना क्रांति के दौर में शायद त्वरित गति से बढ रहे हैं,
आगे क्या,फिर चिंतन कर रहे हैं,
एक सहमति है बनी,हम धन्यवाद 2019 कर रहे
हैं…..।।

हम होश हवाश में कर रहे हैं,
या हम जोश़ से लबरेज़ हो कर रहे हैं,
हम क्या वक्त को आदर दे
कर रहे हैं,
नहीं, हम संस्कारोँ को धन्यवाद समर्पित कर रहे हैं।

धन्यवाद, धन्यवाद।

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