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मुक्ता टण्डन(1) ( समय प्रतियोगिता | युगान्तकारी रचना हेतू प्रशंसा पत्र )

सुनो!!
घड़ी की टिक-टिक क्या कहती?
मैं समय हूं–सर्वशक्तिमान–
भूत, भविष्य और वर्तमान
मेरे अलग-अलग रूप
मेरी यही पहचान।
मैं अनादि मैं अनंत
मैं ही काल —
इस ब्रह्माण्ड में मैं ही ईश्वर समान
मेरी गति चिरकाल से अविरल बहती जीवन सरिता समान
कभी कोई मुझे रोक न पाया
कब आया,कब गया मैं
यह राज़ कोई जान न पाया

न रूप, न गंध ,मैं निर्विकार
फिर भी अनमोल
पल- पल मेरा अमूल्य रत्न समान
क्या राजा,क्या रंक
क्या मूर्ख, क्या ज्ञानी
क्या पशु,क्या अन्य प्राणी
सभी मेरी कृपा को तरसते
पर जिसने भी मुझे दिया है सम्मान
वही बना है महान–
मैं समय—बड़ा बलवान

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