अक्षय
सूर्योदय के समय व्योम पटल पर
सुनहरे रंग बिखेरने वाली
प्रथम रश्मि रहे अक्षय,
छनछनाती जीवनमयी बूंदों से
धरती की प्यास बुझाने वाली
हर वर्षा रहे अक्षय,
तप्त रेगिस्तान में स्वर्ग का आभास कराती;
वरदान सी लगती; शाद्वल रहे अक्षय,
मातृत्व से भरे हर हृदय के स्पंदनो की पुकार
आशीर्वाद बनकर रहे अक्षय,
मन से निकलने वाली सकारात्मक भावनाओं से पनपती;
होठों पर आनेवाली;
नेत्रों से मन में उतरने वाली स्मित रहे अक्षय,
जिज्ञासा से उभरी; गुरु-शिष्यों को प्रेरणा देती
ज्ञान दान के लेन-देन की तृप्त भावना रहे अक्षय,
पुरूष से प्रकृति की खोज;
आत्मा से परमात्मा की खोज;
शिव से सत्य की खोज रहे अक्षय,
जनक – पुत्र से पवित्र आत्मा की;
अल् – आह् से अल्लाह की;
शिव – शक्ति से ओंमकार की ;
उद्हृत ध्वनि रहे अक्षय।।
….मधुरा लडकत……