*कविता का शीर्षक*
🎊 *श्याम संग होली*🎊
मोहे रंग दे मोरे श्याम
अपनी प्रीत से मोहे रंग दे
फूल बहार, छींटे फुहार
अबीर गुलाल सब फीके रे
बस तू अपनी प्रीत से रंग दे।
अंखियां तरस गईं ,
फाल्गुन महिना मोहे
खींचे तेरी ओर,
अब तो बरस मेरे सजना,
मेरे अंग को कर दे सराबोर।
अंग से अंग लगा के ,
खींच ले मोरी चुनरी,
ले जा चुरा के मोरा जिया ,
पर खेल मेरे संग होली ,
मोरे श्याम, खेल ले मोरे संग होली।
श्याम आओ संग करें
हंसी ,ठिठोली,
अब तो तू है मेरा हमजोली,
तेरी राधा तो कब की तेरी होली।
तेरी राधा तो कब की तेरी होली।
रचयिता 📝✒️
*शिप्रा अभ्यंकर*
