हमारे विचार ही वो खाद होते हैं जो हमारे जीवन की फसल बोते हैं । फसलें
भी बारिश से उगती हैं , बाढ़ से नहीं।आपकी बड़ी सोच ही आपको बड़ा बनाती है । सकारात्मक सोच ही ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा बनती है ।
सुधा चंद्रन बहुत ही सुन्दर सुशील लड़की थी ,नृत्य ही उसका शौक था। अचानक एक हादसे में उसकी एक टांग घुटने तक कट जाती है ।जीवन से निराश न होकर आपरेशन के बाद अपनी अथक कोशिश से एक डाक्टर की सहायता से जयपुर फुट लगवाती है।
अत्यधिक पीड़ा सहन करते हुए भी वह
अपना शौक और नृत्य का अभ्यास नहीं छोड़ती। धीरे – धीरे पीड़ा को हराकर वह पुनः नृत्य में पारंगत हो जाती है ।
स्टेज शो करती है,इस तरह और एक मौका उसे बालीवुड और टी वी जगत में
मिलता है ।उसकी पहली फिल्म “नाचे मयूरी” प्रदर्शित होते ही वह सब की चर्चा का विषय बन जाती है ।सभी विकलांगों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बनकर उभरती है ।
सच है मन के हारे हार है मन के जीते जीत। ठान लो जो तो कुछ भी असंभव नहीं है ।हमारे सकारात्मक विचार ब्रह्मांड की सकारात्मक उर्जा से
टकरा कर एक अद्भुत शक्ति का संचार
करते हैं ।यही वह शक्ति है जो हमें फर्श
से उठाकर अर्श तक पहुंचाती है ।
कोशिश करें जो इन्सान तो क्या हो नहीं सकता
वो कौन सा पत्थर है जिसे ढो नहीं सकता ।।