(पुराने दरवाजे की कुण्डी)
हां यही पुराना वाला आंगन था, जिसके पिछले दरवाजे से लटकती थी हमारे बचपन की सबसे ऊंची और कठिन कुंडी। जिसके ऐन केन प्रकारेण खुल जाने से, खुलती थी हमारे लिए एक नई दुनिया, लेकिन वह दरवाजा खोलना इतना भी आसान नहीं था कभी किसी साथी की पीठ तो कभी कोई टूटा स्टूल हमारे मिशन में मदद किया करता था।
आज उसी आंगन में फिर खड़ी हूं जहां से भागकर दुनिया देखने की जितनी तीव्र इच्छा तब होती थी, उतना ही प्रगाढ़ प्रेम जागा है आज इसे फिर से देखकर, अब भागने का नहीं इसी आंगन के किसी कोने में छिप जाने का मन है।
रोमांच से भर गई हूं, पुरानी हर बात ऐसे याद आ रही है जैसे मन की बंधी कोई कलई परत दर परत खुलती जा रही है। स्कूल का बस्ता, गुड़िया की सगाई, दुनिया भर के खेल, कभी मिट्टी की मिठाई, सब जैसे किसी रेल की तरह मेरी आंखो के सामने से गुजरता जा रहा हो और मैं जिंदगी के प्लेट फार्म पर खड़ी अपनी ही परछाई का इंतजार कर रही हूं।
आंगन में चलते हुए पैर में जलन हुई तब तंद्रा टूटी, वो कच्ची मिट्टी का आंगन आज फर्श मे तब्दील दिखा जो धूप के कारण जल रहा था, जितना रस उस आंगन की कच्ची जमीन में था उतनी ही नीरसता दिखी आज इसके पक्के फर्श व रंगीन दीवारों में। बारिश में पैरों से लिपटने वाली मिट्टी के आंनद की तुलना इस रूखे अभिवादन से क्या ही करना।हम सबका शोर-शराबा, अम्मा का गुस्सा सब झेल कर भी यह आंगन हमेशा खिल खिलाता मिलता था, मगर आज इस आंगन की पीड़ा मुझे मेरे गालों पर महसूस हो रही थी।
जहां हमने कभी ना टूटने वाले सपने देखे थे वो आंगन मेरे सामने बिखरा पड़ा है, कई लोगों को इसे अपना हिस्सा कहते सुना है।
‘दीदी घर चलो’…….
यही आवाज कई बार सुनने के बाद मुझ में कुछ जागृति हुई, तब पता चला मैं किसी दूसरे के हिस्से वाली जमीन पर खड़ी थी और मुझे घर से बुलावा आ रहा था कि अपने घर आओ।
मैं कपोलों पर फीकी सी मुस्कान लेकर वापस लौट रही थी, इस बार आंगन मुझे ताक रहा था जैसे उसे कोई उम्मीद थी अब तक और मैं उसकी उम्मीद से खुद को छुपाने की कोशिश कर रही थी। अब मुझे डर है कहीं ये आंगन मुझे पहचानने से इंकार ना कर दे।
‘ कनक ‘
19 Comments on “कनक लता कनौजिया। (विधा : लघु लेख) (दादी नानी की कहानियाँ | सम्मान पत्र)”
माटी प्रेम की उत्कृष्ट मिशाल जो हम आजकल आधुनिकीकरण के दौर में भूलते जा रहे हैं उस खुशबूदार ज़मीन को. उम्दा लेखन. किताबों का हिस्सा बनाना होगा हमे ऐसे लेखन को ताकि भारत माटी की खुशबु बरकरार रख सके.
बेहद शुक्रिया चिरंजीव
प्रयास करूंगी अपने लेखों से आपके उम्मीद पर खरी बनी रहूं।।
Wow amazing story 👌🏻👌🏻
Man ko chhoo lene wali baehtreen kahani ❤️
Zaroort h aisi Lekho ki samaaj ko
Very nice story🙂🙂
Bauth axa mam nice
Bahut sundar laghu katha h hamare atit ko jivant karti h ye apki laghu katha.
वाह वाह वाह बहुत ख़ूब
बेहद शुक्रिया चिरंजीव
प्रयास करूंगी अपने लेखों से आपके उम्मीद पर खरी बनी रहूं।।
बहुत अच्छा mam
बचपन की स्वर्णिम यादों को बखूबी से उल्लेखित किया है आपने , बहुत ही उम्दा लेख
Very nice
भावनाओं से परिपूर्ण है यह लेख, बहुत खूब 👌👍🥰🥰🥰
बहुत सुंदर लेख कनक जी
ATI khubsurat karna ji
Bahut khoobsurat 👌👌👌👌
ATI Sundar 👌👌👌
ATI khubsurat karna ji