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एकता श्वेत गोस्वामी। (विधा : लघु कथा) (मेरा देश मेरा अभिमान | प्रशंसा पत्र)

विभा जी रसोई में तेज तेज अदरक कुटती हुई बड़बड़ा रही थी ,”बस फोन कर देता है ,नहीं आऊंगा 6 महीने से अगस्त का इंतजार कर रही हूं क्या क्या सोच रखा था। घर-घर तभी लगता है जब कुणाल घर पर होता है पर उसे क्या पता मां की ममता”।
कर्नल साहब विभा जी को बडबडाता हुआ सुन रहे थे। वह धीरे से रसोई में आए और बोले “अरे मैडम विभा जी कुणाल तो भारत मां का लाल है वह तुम्हारी ममता समझता है महसूस करता है पर तुम एक वीर सिपाही की मां हो, पत्नी हो, जिसके सारे रिश्ते देश पर निसार हैं फिर यह गुस्सा क्यों कर रही हो”।
विभा जी ने जवाब दिया “यह गुस्सा एक मां बेटे पर कर रही हैं। बाकी तो मैं भी जानती हूं जिस देश पर हम आज स्वाभिमान व गर्व करते हैं वह कुणाल जैसे सिपाही है जो सीमा में खड़े रहकर भारत वासियों की रक्षा कर रहे हैं ।फोन नहीं आने का आया तो मैं परेशान हुई पर वह युद्ध के लिए बॉर्डर पर गया है तब मेरा सीना चौड़ा हो गया कि मेरा लाल भारत मां की रक्षा पर गया है”।
फोन की घंटी बजी। कुणाल दुश्मन की सेना को हराकर अपने भारत देश का ध्वज सीमा पर फहरा आया है पर शहीद होकर। उसकी शहादत पर कर्नल परिवार आज गौरवान्वित है कि भारत की आन बान शान व स्वाभिमान के लिए कुणाल ने तिरंगा अपने शरीर से लिपटा लिया है।
स्वरचित व मौलिक
एकता श्वेत गोस्वामी

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