
निशा टंडन। (विधा : कविता) (भाषा | प्रशंसा पत्र)
उमड़ते हुए बस जज़्बात है ये जब कहनी हो किसी से मन की बात हो कोई भी बोली या कोई ज़ुबान हर किसी के नसीब

उमड़ते हुए बस जज़्बात है ये जब कहनी हो किसी से मन की बात हो कोई भी बोली या कोई ज़ुबान हर किसी के नसीब

भाषा ही तो है कभी लगे शहद कभी नीम सी अनीता वाधवानी

प्यार की कोई भाषा नहीं होती , खामोशी भी अक्सर काफ़ी है दिल में छुपे जज़्बात समझने के लिए। निशा टंडन
साम्प्रदायिकता का दुष्परिणाम भाषाओं को भी भुगतना पड़ा ..……… लोग हिन्दी को “हिन्दू” उर्दू को “मुसलमान”समझने लगे ! ✍🏼मनीषा तिवारी

कैसे बताऊँ , कितनी प्यारी हो तुम , मुझे मेरे माँ बाबा से,और उनको उनके से मिली हो तुम , कहना सुनना,सीखना सीखना ,सब तुमसे

भाषाएँ वाहक है सम्वेदनाओं की प्रसारक है अनुभूतियों की भाषक है भावनाओं की शब्दों और वाक्यों के माध्यम से भाव भरती है सोचते हैं हम

भाषा…..एक अनमोल उपहार ***************************** साहित्य समाज का दर्पण,भाषा उसका रुप-शृंगार भाषा मानवता के लिए ईश्वर प्रदत्त अनमोल उपहार। आँखों की अपनी भाषा सब कह जाती

Life is Beautiful, live it now, with a full breath there is no replay .. . Šolkotović Snežana

Infamous delay Is a blessing in disguise Creative delight.

The coming morrow brings dubiety, accomplish what you have set your eyes upon and without delaying achieve them today. Nisha Tandon
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