
रीता बधवार। (विधा : कविता) (काला धब्बा | प्रशंसा पत्र)
नज़र-नज़र की बात है, दुखते दिलों का सवाल है, काला धब्बा ख़ूबसूरती का प्रतीक है, या दु:खी दिलों का मलाल है, शिशु के भाल पर

नज़र-नज़र की बात है, दुखते दिलों का सवाल है, काला धब्बा ख़ूबसूरती का प्रतीक है, या दु:खी दिलों का मलाल है, शिशु के भाल पर

अजब काला ये धब्बा है, हँसाता है, रुलाता है , कभी लगता बड़ा सुंदर, कभी लेकिन न भाता है ! कभी रुक्सार का वो तिल,

नव्या उछलतीं हुई अपने घर आई और आते ही,”पापा मैंने ग्यारवीं कक्षा में बायोलॉजी विषय लिया है।” “चलो अच्छी बात है पूरे गाँव में कोई

राशि आज फिर उन्हीं गलियों में थी ,जहां सालों पहले आना जाना हुआ करता था।पर इन सालों में समय की दरिया में बहुत पानी बह

काला निशान मतदान समाप्त हार या जीत

जो काला धब्बा दिखे सब जगह चश्मा उतारो ~~श्याम सुन्दर शर्मा

कवि ने कागज़ लिया ना शुरु किया, ना अंत किया बस एक “काला धब्बा “बना दिया “आज” का “सच” यूहीं समझा दिया । स्वरचित #स्वातिगर्ग

सही परवरिश ,मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे के गाल का काला टीका समाज में काला धब्बा बन फैलता है । सर्वाधिकार सुरक्षित(C) भार्गवी रविन्द्र

काले मोतियों की माला पहन ली तो मंगलसूत्र कहलाता है ये काले रंग की डोर से एक रिश्ता बाँध लिया जाता है सुहागन के शिंगार

कजरौटा ——- घनी कजियारी रात में आई, वो काजल की डिबिया, सब ने देख एक आह भरी, कैसी है यह गुड़िया! काजल नाम दिया माँ
UBI stands for United By Ink®️. UBI is a Global Platform- the real-time social media interactive forum created for Readers, Writers and Facilitators alike.This platform aims to help creative souls realize their writing goals.