
रीटा बधवार (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र (कविता ))
“धरती माँ” हिरण्यमयी,सुवर्णा,रत्नगर्भा, न जाने कितने तेरे नाम अनंत काल से तू करती आयी लालन-पालन…प्यारी धरती माँ खेल कूद कर बड़े हुए हम तेरी माटी

“धरती माँ” हिरण्यमयी,सुवर्णा,रत्नगर्भा, न जाने कितने तेरे नाम अनंत काल से तू करती आयी लालन-पालन…प्यारी धरती माँ खेल कूद कर बड़े हुए हम तेरी माटी

धरती माँ । शिबराज प्रधान। दर्पण पे लिखावट के शर्तोंमे सँवरके सुरम्यताके मोहिनी तर्जौंमे थिरकके चपल लहरों के जूदा रीत मे बँधके तेरे असीमित अंकमालमे

धरती माँ स्वर्ग से सुन्दर धरती माँ ये जान हमारी है, हम हैं बच्चे इसके ये पहचान हमारी हैI धरती माँ का एहसास कभी हम

वैसे तो मैं भी इक माँ हूँ, धरती सी लेकिन कहाँ हूँ। इससे बड़ा ना कोई दानी, इसका नहीं है कोई सानी। मीलों तक फैला

धरती है माता मेरी ,प्रकृति की है दुलारी माथे धारें पद रज ,महिमा ही गाई है।। १!! अविनाशी अवनि की, बात ही निराली सखी युगों

धरती की सुंदरता इसके पेड़ पौधे शैवाल कवक चहूँ ओर फैली ये हरियाली है छीन रहे हम नासमझ… पाने को क्षणिक खुशहाली हैं धरती के

धरती माँ **** कैसे गुणगान करूँ मैं तेरी हे धरती माँ, शत-शत नमन करूँ तुझे हे धरती माँ । बच्चों की खातिर सीने में कुदाल

धरती यही तो है हम सबकी माँ! इस जेसा कहाँ दूसरा ! इसकी पनाह मै ! दुिनया पलती है ! जो पल पल रंग बदलती

Mother Earth Life that is endless without boundaries That which is always giving We should return without being asked Only then will make it worth

Title: Live and Let Live Sustainably Look at the snow meting on the mountains Giving birth to countless streams Fresh rivers rushing to the sea
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