
हमने हवाओं का रुख बदल दिया है, शुष्क हवाओं में नमी को भर दिया है, रमजान की अदानों के जरिए, रुहानी महक को भर दिया

अश्रु-विगलित रमणी का करुणा से भरा व मार्मिक गीत लिखने का प्रयास। विदा का मार्मिक दृश्य दर्शाता। जब दरवाज़े पर मृत्युदाता का बुलावा आ जाता

ग़ज़ल हर आशिक जैसा अपना भी अंजाम हो गया। पाकीज़ा मोहब्बत का क़त्ल फिर, सरेआम हो गया।। हल्की सी वो छुवन आज भी सिहरन पैदा

तन पर भस्म रमा कर, बालों की फिर जटा बनाई। आह्वान कर संगीत का, शिव चले ब्याहने पार्वती माई।। कण – कण नृत्य मग्न हुआ,

आज मेरी किरण से साथ शायद चौथी बार पार्टी में फिर से मुलाक़ात हुई। और आज भी उन्होंने मीठा खाने से बिल्कुल इंनकार कर दिया।

When empty words ring what is there to sing? Even ideas fly away, dull goes writing ray. Single sane, no bylane. Build from scratch, modify

With forbidden joyous windows creep here weeping willows none other but widows. Inside or out of shrines are seen singing whines akin to kites sans

न जाने। क्यों वो शख़्स, दिल में समा गया। जागें वो मेरे ख़्वाबों में, जहन पे छा गया।। न इकरार न इंनकार, न तकरार न

हृदय की गहराईयों से आत्मा की ऊँचाइयों से बहता हुआ भावनाओं का इत्र जब बनाता है कागज की जमीन पर अनगिनत शब्द चित्र तब बनती
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