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LIFE GOES ON

मुक्ता टंडन (विधा : कविता ) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

सुख दुःख की पटरी पर जिंदगी की गाड़ी ऐसे ही दौड़ती भागती रहती है कभी उठती, कभी गिरती, कभी लड़खड़ाती बचपन, यौवन, बुढ़ापे के आयामों

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अमित गुप्ता (विधा : कविता ) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

चलता हूँ….!! टूटता हूँ , बिखरता हूँ, रोज..! जिंदगी के सलीके सीखने में..!! हर मंजिल पे नया मोड़ मिलता है, जिंदगी के इस सफ़र में..!!

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शशि कांत श्रीवास्तव (विधा : कविता ) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

” उलझी-जिंदगी “ जिंदगी के जद्दोजहद के बीच वो उलझी हुई जिंदगी वहीं …., इस चिलचिलाती गर्मी में पेट की आग के खातिर करती है

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सरिता तिवाडी (विधा : लघु कथा) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

सुलक्षणा ….जैसे नाम वैसे गुण । अपने पिता की इकलौती सन्तान ,जब उसके लिए उच्च शिक्षित परिवार से रिश्ता आया तो माँ बाप ने उसकी

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एकता श्वेत गोस्वामी (विधा : लघु कथा) (चलती रहे ज़िंदगी | सम्मान पत्र)

उड़ने की चाह उड़ने की चाह है तो रुक मत ऐ परिंदे। बाधाएं तो आएंगी पर जीत है तेरे उड़ने में”। कविता का बचपन से

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