
“अवाम का आत्मकथ्य”
हम चाहने वाले पशु हैं हम जो होता है उसे ही चाहते है बाद में उसके होने का शोक मनाते हैं बाद में जो नहीं

हम चाहने वाले पशु हैं हम जो होता है उसे ही चाहते है बाद में उसके होने का शोक मनाते हैं बाद में जो नहीं

बड़े अजीब है लोग सांप से लहराते हुए चलने वाले बात बात पर बात बदल बदल के बोलने वाले लोगों के लिए आप महज़ पीकदान

आज भी देखा है मैंने पिता को शाम को कंडिया लेकर शनिवार के रोज़ कट्टे के थैले में हमारे लिए खिलौने लाते हुए पहले छुपाते

आसान है चुप रहना बहुत आसान है बकबादियों के विवर में चुप रहकर बचे रहना कालों की दुनिया में सफेदपोश हो किसी भी अंदर के
कवि एक योद्धा है जो नही लड़ने को उत्सुक है हाथ पैरों की लड़ाई पर रोक नही सकता मन को प्रतिकार करने से वो शब्दों

SONG FOR UNSUNG HEROES “UNREVEALED THOUGHTS OF HEARSE DRIVER” How he lived and how he died, How he swam against life‘s tides, Did he spend

खट्टी मीठी यादों की स्मृति है जिंदगी, कभी अनूठी, अनसुलझी पहेली है जिंदगी। कभी धूप की चाह, पर बरसात है जिंदगी, आस – निरास के

शीर्षक: मंजिल पाने तक तुम भी कुछ कदम चलो, हम भी कुछ कदम चलें, कदम से कदम मिलाकर मंजिल पाने को निकल पड़े बहते चले

चलती रहे जिंदगी रेलगाड़ी सी बेतहाशा रफ़्तार से चल रही, कभी खट्टी तो मीठी यादों में ढल रही, सरपट दौड़ते दृश्य अद्भुत प्यारे, पीछे छूटते

(इस कथा में पात्र का नाम बदल दिया गया है) चलती रहे ज़िन्दगी न रुकना ही ज़िन्दगी है ..और सलाम उस ज़िन्दगी से जूझने वाले
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