
सीमा वालिया । (विधा : कविता) (ग्रहण | सम्मान पत्र)
तुम्हारे और मेरे बीच की चुप्पी भी तो ग्रहण ही है ना ……….?? सुनो ………क्या यही सच है ???? देखो ….ना …क्या यह भी ग्रहण

तुम्हारे और मेरे बीच की चुप्पी भी तो ग्रहण ही है ना ……….?? सुनो ………क्या यही सच है ???? देखो ….ना …क्या यह भी ग्रहण

शीर्षक: थर्डजेंडर-प्रकृति का ग्रहण प्रकृति की रचना पर ग्रहण तो पहले से ही लगा था , जब खुदा ने जमीं पर भेजा था ना अपने

We were little early for the meeting. While chatting, Swati shared experience of her recent visit to her uncle. They are four people in the

सिमरन अपने आप को आईने में निहार रही थी..आज तो बहुत खूबसूरत लग रही थी वो। सच में,कितना खुश होगा राजेश उसे देखकर!मन ही मन

एक लड़की पलो में औरत बन जाती है । किसी की बेटी से किसी की बहु बन जाती है । किसी की बहन से किसी

नववधू बनकर खड़ी हूं आज नए आंगन में जाने कैसी उथल पुथल मची है मन में जानती हूं मीन मेख भरी नजरें मुझे परखेगी और

कविता का नाम: मेहंदी का रंग। बात जब बाबुल का घर छोड़ने की आयी, नाम पिया का ले, मेहंदी उसने लगाई। किए उसने वह सारे

शिवी खुद को आईने में निहार रही थी कि तभी बड़ी बुआ आ गयी,”शुकर है भगवान को ई मॉडी (बेटी)को ब्याओ हो राओ है…नाइ तो

माँ!! क्यों प्रिया के साथ जबरदस्ती मेरी भी शादी करने पर तुली हो ! मुझे पढ़ने दो,, अगर नौकरी लग गई तो अपने आप अच्छे

“हर दुल्हन का बस एक ही सपना,सुंदर,प्यारा सा घर हो अपना जिसमें सारे अपने बसते हो,और उनमें अपनों के सपने हँसते हो रिश्तों को जोड़े
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