
सुशीला गंगवानी। (विधा : लघु कथा) (मेरा देश मेरा अभिमान | प्रशंसा पत्र)
मैं संगीता एक छोटे से शहर में रहती हुं।हमारे विस्तार में अलग अलग कोम के सभी लोग रहते हैं।अलग अलग भाषा अलग अलग संस्कृति होने

मैं संगीता एक छोटे से शहर में रहती हुं।हमारे विस्तार में अलग अलग कोम के सभी लोग रहते हैं।अलग अलग भाषा अलग अलग संस्कृति होने

विभा जी रसोई में तेज तेज अदरक कुटती हुई बड़बड़ा रही थी ,”बस फोन कर देता है ,नहीं आऊंगा 6 महीने से अगस्त का इंतजार

मैं भारत की जमीं से हूँ, मुझे तो नाज़ है इसका, तिरंगा वो लहरता सा बना सरताज है इसका ! नजाने धर्म हैं कितने, नजाने

मेरा देश हिंदुस्तान …मेरी जान…मेरा अभिमान जिस पर प्राण निछावर करते हमारे रण बाँकुरे वीर जवान सुंदरता की असली मूरत..नदियाँ,पर्वत,रेगिस्तान व हरे मैदान जिसके स्वाभिमान

रिटायर्ड कर्नल राजिंदरजी रोज की तरह पूजा पाठ करके रामदास जी की तस्वीर पर माला चढ़ा रहे थे। तभी उनका पोता राहुल आया,”दादाजी आप रोज

शस्य श्यामल धरा नीचे,ऊपर लहराता नीला आसमान तीन रंगों की भव्य छटा निराली,तीन रंगों की अनूठी शान रश्मिपुंज चरण पखारे ,करोड़ कंठ से उद्धृत यशो

मेरे देश की माटी, तेरे चरण पखारूँ , करूँ तेरा सम्मान , तू ही तो है अस्तित्व मेरा, और तू ही मेरा अभिमान। वैभवशाली अतीत

………..ECLIPSE, OF MEMORIES………. Vision fainting , memories failing, An eclispe ensuing, Solar or it Lunar ? My pyschiatrist noted, it’s not lunar, sure, No symptom

Hide and seek of light and shadow’ Effects on Earth they like to show; Rotation of Earth round the big star, Close to watery planet;

She believed that life was a fairy tale in which only the most beautiful stories should be told, regardless of the fact that the brave
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