
रजिन्दर कौर। (विधा : उद्धरण) (काला धब्बा | प्रशंसा पत्र)
काला टीका है माँ का प्यार , ममता की गुहार , माँ के मातृव्य को दर्शाता ,अपने बच्चों को बुरी राहों से बचाता , इक

काला टीका है माँ का प्यार , ममता की गुहार , माँ के मातृव्य को दर्शाता ,अपने बच्चों को बुरी राहों से बचाता , इक

कविता : आतंकवादी माँ की वेदना ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ बहुत मन्नत और मुरादों के बाद तुझको पाया पाकर तुझको मेरा ये मन था फूला न समाया ।

नज़र-नज़र की बात है, दुखते दिलों का सवाल है, काला धब्बा ख़ूबसूरती का प्रतीक है, या दु:खी दिलों का मलाल है, शिशु के भाल पर

अजब काला ये धब्बा है, हँसाता है, रुलाता है , कभी लगता बड़ा सुंदर, कभी लेकिन न भाता है ! कभी रुक्सार का वो तिल,

नव्या उछलतीं हुई अपने घर आई और आते ही,”पापा मैंने ग्यारवीं कक्षा में बायोलॉजी विषय लिया है।” “चलो अच्छी बात है पूरे गाँव में कोई

राशि आज फिर उन्हीं गलियों में थी ,जहां सालों पहले आना जाना हुआ करता था।पर इन सालों में समय की दरिया में बहुत पानी बह

काला निशान मतदान समाप्त हार या जीत

जो काला धब्बा दिखे सब जगह चश्मा उतारो ~~श्याम सुन्दर शर्मा

कवि ने कागज़ लिया ना शुरु किया, ना अंत किया बस एक “काला धब्बा “बना दिया “आज” का “सच” यूहीं समझा दिया । स्वरचित #स्वातिगर्ग

सही परवरिश ,मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे के गाल का काला टीका समाज में काला धब्बा बन फैलता है । सर्वाधिकार सुरक्षित(C) भार्गवी रविन्द्र
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