
डा. अपर्णा प्रधान । (विधा : गीत ) (जीवन – आनंद | प्रशंसा पत्र )
परदेस की ये हवाएँ ये हवाएँ जो आईं हैं छू कर तुझे सुन रही हूँ मैं इन में धड़कने तेरी तेरी साँसों की ख़ुशबू

परदेस की ये हवाएँ ये हवाएँ जो आईं हैं छू कर तुझे सुन रही हूँ मैं इन में धड़कने तेरी तेरी साँसों की ख़ुशबू

बड़ा प्यारा ये जीवन है, नहीं इसको गँवाओ तुम, दिए जाता है जो तुमको, गले उसको लगाओ तुम ! बड़ी ही मुश्किलों से देह

जीवन …..व्यर्थ न गँवाओ ******************************** नहीं लौटकर फिर आने वाला ..बीत गया जो कल न जानें क्या ले आए संग अपने …आने वाला कल किसी

हरित धरा के आंचल सा ये पथ मानो कुछ बोल रहा हृदय प्रफुल्लित करता सा मधुरस परिवेश में घोल रहा यह हवा मंद सी

जीवन में आनंद एक सुखद अनूभूति देता है। किसी के होने का अहसास हमारी जिंदगी को अनमोल बनाता है वैवाहिक गठबंधन भी जीवन में सुखद

क्यों ना गाऐं गीत? रुंधे ये गले नहीं, रच लेंगे संगीत, सुर अभी ढ़ले नहीं। फिर महकेगी उपवन में, खुशी भोर के तारे की।

💐समाधि 💐 अकेली… ???? मैं कहाँ रहती हूँ अकेली ? जब सोचती हूँ तुम्हें, तुम्हारे स्पर्श का अहसास, वो बोलती आँखों की चमक, सरल

धन-धान्य, भव्य इमारत नहीं परिभाषित करते हैं जीवन आनंद जगती के लघुत्तम कण में समाहित ख़ुशियाँ विचरती हैं स्वच्छंद। मौलिक सर्वाधिकार सुरक्षित (C) भार्गवी रविन्द्र.

आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार ही जीवन का परम आनंद है। मनुष्य को इसकी प्राप्ति के लिए भरपूर प्रयास करना चाहिए। @रीता बधवार (स्वरचित) (सर्वाधिकार
A well-structured novel can be the edge you have over anybody else who could pick up their pen and write. It’s what can make your
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