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ग़ज़ल 

ग़ज़ल हर   आशिक   जैसा  अपना  भी  अंजाम  हो  गया। पाकीज़ा मोहब्बत का क़त्ल फिर, सरेआम हो गया।। हल्की सी वो छुवन आज भी सिहरन पैदा

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स्वस्थ स्वास्थ्य का उपहार

आज मेरी किरण से साथ शायद चौथी बार पार्टी में फिर से मुलाक़ात हुई। और आज भी उन्होंने मीठा खाने से बिल्कुल इंनकार कर दिया।

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Hindi Poetry

गीत – प्रित-राग

बरबस खिंचा जाए मन, पहन प्रेम का चोला। एक हृदय मन चुम्बक है, एक हृदय मन लोहा।। आँखे देख न पाएँ, मन, पंख लगा उड़

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