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ईद

हमने हवाओं का रुख बदल दिया है, शुष्क हवाओं में नमी को भर दिया है, रमजान की अदानों के जरिए, रुहानी महक को भर दिया

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Hindi Poetry

अभिलाषा ने करवट बदली

1 अभिलाषा ने करवट बदली, ली है अंगड़ाई पीड़ा ने । नया राग फिर छेड़ा कोई, मेरे मन की वीणा ने ।। 2 अस्ताचल में

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अश्विनी राय (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | सहभागिता प्रमाण पत्र)

कल का राजा अंधा था आज अंधे ही भरे हैं दरबारों में जनता बहरी गूंगी जन्मी आज के संसारों में यहां धरती किसकी माता है

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अरूणा शर्मा (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | सम्मान पत्र (कविता))

माँ वसुंधरा:- “अरे नहीं!!नहीं,अब बस करो!!” वो रोने लगी।अब तो चिल्ला पड़ी। मगर……बड़े निर्दयी हैं सब। कोई नहीं सुनता।किसी को न इसकी पड़ी। एक आई।फिर

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रीटा बधवार (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र (कविता ))

“धरती माँ” हिरण्यमयी,सुवर्णा,रत्नगर्भा, न जाने कितने तेरे नाम अनंत काल से तू करती आयी लालन-पालन…प्यारी धरती माँ खेल कूद कर बड़े हुए हम तेरी माटी

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शिबराज प्रधान (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | प्रशंसा पत्र (कविता ))

धरती माँ । शिबराज प्रधान। दर्पण पे लिखावट के शर्तोंमे सँवरके सुरम्यताके मोहिनी तर्जौंमे थिरकके चपल लहरों के जूदा रीत मे बँधके तेरे असीमित अंकमालमे

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हेमलता मिश्रा मानवी (UBI धरती माँ प्रतियोगिता | सम्मान पत्र (कविता))

धरती है माता मेरी ,प्रकृति की है दुलारी माथे धारें पद रज ,महिमा ही गाई है।। १!! अविनाशी अवनि की, बात ही निराली सखी युगों

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