
प्रमोद मूँधड़ा (UBI उस गली में प्रतियोगिता | वरिष्ठ कविगण)
इस गली से उस गली.. उस गली से इस गली खुद से भी बेखबर.. लिए मन में खलबली चलते हुए आदमी थके थके उदास से

इस गली से उस गली.. उस गली से इस गली खुद से भी बेखबर.. लिए मन में खलबली चलते हुए आदमी थके थके उदास से

अखबार के पन्ने पलटे तो तुम्हारे शहर की फ़िज़ा महसूस हुई.. सुना है, वो गली जो बिस्मिल्लाह चौक से होकर राम मंदिर को जाती थी

On that street I saw the old food stall, Selling delicacies and snacks in plenty. Crowds hover around the stall like hawks, Trying to get

नैया है सबकी, सब हैं खिवैया ज़िम्मेदारी सबकी, सब हैं मुखिया यार नहीं होते तो पतवार नहीं होती पतवार नहीं होती तो मँझधार ले डूबोते

आज मौसम था सुहाना,बारिश भी कुछ जुदा थी तेरी कातिल जवानी, कमसिन हर अदा थी|| उधर बरसता रहा सावन,इधर बरसता तेरा यौवन तुझे छूने

बूंदें बारिश की आसमान से, उतर पाक ही आती हैं। ना पालती प्रीत किसीसे,ना बैर ही पनापाती हैं। शुरुवाती बूंदें तो ऐसी, सकुचाई सी

मोटी-मोटी बूंदों की मचलती बारिश; जैसे बुन रही हो कोइ साज़िश; कर रही हैं देखो फूलों को विभोर; और कह रही हैं “जल्द ही आएगा

झर झर गिरती धाराओ का इस धरती पर क्या काम सर सर दौड़ती इन नदियों को कण-कण देता भिगा सलाम हैं कौन यह बावली

सावन की पुकार। बिजली कड़के आकाश गरजे साथ,हवा बहके घटायें तड़पे । रिमझिम सरगम झंकृत तन मन आंगन छमछम मोहक नर्तन। नदियां बेगवान

ए सावन तू क्यों आता है मेरे मायके की यादें साथ लाता है याद आता है वो जतन जिससे मैं कपड़े लगाती थी ये यहाँ
UBI stands for United By Ink®️. UBI is a Global Platform- the real-time social media interactive forum created for Readers, Writers and Facilitators alike.This platform aims to help creative souls realize their writing goals.