- बरगद के पेड़ जैसी छाया है उनकी ,
कितनी पवित्र और कितनी शीतल ।
नारियल जैसा ह्रदय है उनका ,
बाहर से कठोर और अंदर से नरम ।
कंधे पर इतना बोझ,तब भी मुस्कुराते
वो ही तो पिता कहलाते ।।खुद के बारे में कभी ना सोचते ,
बस बच्चों को खुश करने के तरीक़े खोजते ।
उनके आशीर्वाद से बन जाते सारे काम,
हमें सदेव करना चाहिए उनका सम्मान।
जो बच्चों के लिए ख़ुशियों की नन्ही सी दुनिया बनाते,
वो ही तो पिता कहलाते ।।स्वरचित
राशी रेनवाल©️